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आज सड़कों पर भीख मांग रहा है देश का होनहार खिलाड़ी, वजह जानकर आपको भी नहीं होगा यकीन!

ये तो आपको भी पता होगा कि जब किसी व्यक्ति के पास दूसरों से अलग कोई हुनर होता है और उस हुनर की बदौलत उसको देश-विदेश में लोगों की प्रशंसा मिलती है तो हर कोई उसको अपने पाले में समेटने की कोशिश करता है. ऐसा ही रिश्ता खेल और राजनीति का भी है. जब भी कोई खिलाड़ी विदेशों में जाकर अपने खेल से देश का नाम रोशन करता है तो वो जिस राज्य में वो रहता है वहां की सरकार उसको इनाम में धनराशि, सरकारी नौकरी देने की घोषणा करती हैं, लेकिन सरकार के द्वारा की गयी घोषणाओं में कितनी सच्चाई होती है आज हम आपको इसी बारे में बताने जा रहे हैं. मध्य प्रदेश में रहने वाले एक दिव्यांग खिलाड़ी मनमोहन सिंह लोधी को मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार ने बहुत सपने दिखाए, लेकिन अफ़सोस की बात ये है कि उनको दिखाए गए सपने पूरे नहीं किये गए जिसकी वजह से आज ये खिलाड़ी सड़कों पर भीख मांगने को मजबूर है. तो चलिए विस्तार से जान लीजिये पूरा मामला…

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सड़क हादसे में गंवाया था एक हाथ 

एथलीट मनमोहन सिंह लोधी नरसिंहपुर जिले की गोटेगांव तहसील के कंदरापुर गांव में रहते हैं. 2009 में एक हादसे में एथलीट मनमोहन सिंह लोधी का एक हाथ कट गया था, लेकिन फिर भी उन्होंने कभी भी हिम्मत नहीं हारी और दौड़ में बहुत से राजकीय और राष्टीय पदक अपने नाम किये. एथलीट मनमोहन सिंह लोधी ने अदमदाबाद में आयोजित 100-200 मीटर की फर्राटा दौड़ में सिल्वर मेडल जीता था. 2017 में मध्यं प्रदेश सरकार ने मनमोहन लोदी को मध्य प्रदेश का सर्वश्रेष्ठ दिव्यांग खिलाड़ी घोषित किया था.

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मध्यप्रदेश सरकार ने किया था दिव्यांगों को सरकारी नौकरी देने की घोषणा 

बता दें कि 2017 में राष्ट्रीय पदक जीतने वाले दिव्यांग खिलाड़ियों को मध्य प्रदेश सरकार ने सरकारी नौकरी देने का ऐलान किया था और ये भी कहा था कि 6000 पदों पर दिव्यांगों की भर्तिया की जायेंगी, लेकिन मध्य प्रदेश की सरकार अपना ये वादा भूल गयी और आज इसी वजह से मनमोहन सिंह लोधी सड़कों पर भीख मांगने को मजबूर है.

इस वजह से भीख मांग रहे है मनमोहन सिंह लोधी

मनमोहन ने बताया कि ” जब मुझे मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा की गयी इस घोषणा के बारे में पता चला तो मैंने सरकारी नौकरी पाने के लिए प्रयास करने शुरू किय, लेकिन मुझे नौकरी नहीं मिली”. मनमोहन ने आगे बताय कि ”मैंने  बहुत बार मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से भी मुलाकात कि लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ. जिसके बाद मैंने  घर चलाने के लिए सड़कों पर भीख मांगना शुरू कर दिया”.

 

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