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अगर आपने भी शिव और पार्वती का देख लिया ये रूप, तो रातों-रात बन सकते हैं अमीर

इस दुनिया में भगवान शिव के कई प्रसिद्ध और प्राचिन मंदिर है. जिनके दर्शन करने भारी मात्रा में श्रृद्धलु जाते हैं. माना जाता है कि जिस भी व्यक्ति पर शिव जी और पार्वती जी की कृपा हो जाती है, उनके जीवन में कभी कोई दुख नहीं आता हैं. वहीं आज हम आपको भगवान शिव जी और माता पार्वती एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं. जिसे जानने के बाद आप हैरान रह जाएंगे. तो आइए जानते हैं कौन सा वो चमत्कारी मंदिर जहां दर्शन करने से आप भी रातों-रात बन सकते है करोड़पति.

कौन सा है वो चमत्कारी मंदिर

ये तस्वीर ओंकारेश्वर मंदिर की है. (SOURCE)

आज हम आपको जिस मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, वो मंदिर बारह ज्योर्तिलिंगों में से एक ओंकारेश्वर मंदिर है. बात दें कि ये मंदिर नर्मदा किनारे ऊंकार पर्वत पर बना हुआ है. ये मंदिर ज्योर्तिलिंग में चौथे नंबर का मंदिर माना जाता है. चारों धाम की यात्रा के दौरान इस ज्योर्तिलिंग के दर्शन के बिन यात्रा अधूरी मानी जाती है.

हैरान कर देने वाला रहस्य

इस तस्वीर में आप चौथे ज्योर्तिलिंग के शिव जी के रूप का दर्शन कर सकते हैं. (SOURCE)

हम जिस मंदिर के बारे में आपको बता रहे हैं, वो मंदिर ममलेश्वर नाम से प्रसिद्ध है. बता देें कि इस मंदिर में हर रोज शिव जी और पार्वती जी चौसर-पासे खेलते हैं. ये सिसिला सदियों से चला आ रहा है. मंदिर के मुख्य पुजारी  के अनुसार यहां भगवान शिव और पार्वती हर रोज रात में इस मंदिर में आते हैं और चौसर-पांसे खेलते हैं.

शिव जी और पार्वती जी रोज खेलते चौसर-पांसे

इस तस्वीर में आप शिव जी और पार्वती जी को देख सकते हैें, साथ ही दाईं ओर आप चौसर-पांसे की बिसात देख सकते हैं.(SOURCE)

ओंकारेश्वर मंदिर में रोजाना शिव जी और पार्वती जी चौसर-पांसे खेलने जाते हैं. शयन की आरती के बाद ज्योतिर्लिंग के सामने रोजना चौसर-पांसे की बिसात सजाई जाती है. बता दें कि रात में प्रसूति घर में कोई परिंदा भी पर नहीं मार सकता है, लेकिन फिर भी कई बार पांसे उल्टे पड़े मिलते हैं.

गुप्त आरती

इस तस्वीर में आप चौसर-पांसे की बिसात सजाई हुई देख सकते हैं. (source)

आपको बता दें कि ओंकारेश्वर ज्योर्तिलिंग शिव जी का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां रोजना गुप्त आरती की जाती है. इस समय पुजारियों के अलावा और कोई भी व्यक्ति प्रसूति घर में नहीं जा सकता है. यहां के पुजारी के मुताबिक इस गुप्त आरती की शुरुआत  रात 08:30 बजे रुद्राभिषेक से होती है. वहीं अभिषेक के बाद पंडित पट बंद कर शयन आरती करते हैं. उसके बाद चौसर-पांसे सजाकर फिर से पट बंद कर देते हैं.

हर साल आते हैं नए चौसर-पांसे

ये तस्वीर काल्पनिक है, यहां आप ओंकारेश्वर मंदिर की तस्वीर, शिव जी के दर्शन और शिव जी और पार्वती को एक साथ चौसर-पांसे खेलते हुए देख सकते हैं. (source)

शिव मंदिर में शिवरात्री के दिन भारी मात्रा में श्रृद्धलु पूजा करने जाते हैं. इस मंदिर में हर साल शिवरात्रि के दिन भगवान के लिए नए चौसर-पांसे लाए जाते हैं. शिव जी को खुश करने के लिए इतिहास से सोलह सोमवार की परंपरा चली आ रही है. सोलह सोमवार की व्रत कथा में भी शिव और पार्वती के चौसर खेलने का वर्णन किया गया है. आपको बता दें कि माना जाता है कि जो भी व्यक्ति शिव जी और पार्वती को चौसर-पांसे खेलते हुए देख लेता है, वो रोतों-रात में करोड़पति बन सकता है, लेकिन आजतक कोई ऐसा खुशकिस्मत इंसान नहीं है, जिसने भगवान को चौसर-पांसे खेलते हुए देखा हो.